ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
वस्ल
सभी
8
अशआर
0
ग़ज़ल
8
ग़ज़ल
8
0
हुज़ूर-ए-यार में हर्फ़-ए-इल्तिजा के रक्खे थे
حضور یار میں حرف التجا کے رکھے تھے
0
मक़ाम-ए-होश से गुज़रा मकाँ से ला-मकाँ पहुँचा
مقام ہوش سے گزرا مکاں سے لا مکاں پہنچا
0
जब भी आँखों में तिरे वस्ल का लम्हा चमका
جب بھی آنکھوں میں ترے وصل کا لمحہ چمکا
0
रुकी हुई है अभी तक बहार आँखों में
رکی ہوئی ہے ابھی تک بہار آنکھوں میں
0
रंग ख़ुशबू में अगर हल हो जाए
رنگ خوش بو میں اگر حل ہو جائے
सभी देखें
कवियों की सूची
कवियों
और जानें