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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही
فیض احمد فیض द्वारा
نہیں نگاہ میں منزل تو جستجو ہی سہی
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बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़लाक से है
परवीन शाकिर द्वारा
بخت سے کوئی شکایت ہے نہ افلاک سے ہے
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