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वहशत

सभी 13अशआर 0ग़ज़ल 13
ग़ज़ल13
ऐश उम्मीद ही से ख़तरा है
عیش امید ہی سے خطرہ ہے
वहशत थी हमें भी वही घर बार से अब तक
وحشت تھی ہمیں بھی وہی گھر بار سے اب تک
وحشتیں بڑھتی گئیں ہجر کے آزار کے ساتھ
وحشتیں بڑھتی گئیں ہجر کے آزار کے ساتھ
दिल पे इक तरफ़ा क़यामत करना
دل پہ اک طرفہ قیامت کرنا
अभी इक शोर सा उठा है कहीं
ابھی اک شور سا اٹھا ہے کہیں
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