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याद-ए-यार

सभी 25अशआर 0ग़ज़ल 25
ग़ज़ल25
दिल में अब यूं तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
دل میں اب یوں ترے بھولے ہوئے غم آتے ہیں
जब तक मरे होंटों पे तेरा नाम रहेगा
جب تک مرے ہونٹوں پہ ترا نام رہے گا
अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा
اپنے گھر کی کھڑکی سے میں آسمان کو دیکھوں گا
अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएं हम
اب اور کیا کسی سے مراسم بڑھائیں ہم
पयाम आए हैं उस यार-ए-बे-वफ़ा के मुझे
پیام آئے ہیں اس یار بے وفا کے مجھے
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