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दिल में अब यूं तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
دل میں اب یوں ترے بھولے ہوئے غم آتے ہیں
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जब तक मरे होंटों पे तेरा नाम रहेगा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جب تک مرے ہونٹوں پہ ترا نام رہے گا
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अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा
Amjad Islam Amjad द्वारा
اپنے گھر کی کھڑکی سے میں آسمان کو دیکھوں گا
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अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएं हम
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب اور کیا کسی سے مراسم بڑھائیں ہم
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पयाम आए हैं उस यार-ए-बे-वफ़ा के मुझे
अहमद फ़राज़ द्वारा
پیام آئے ہیں اس یار بے وفا کے مجھے
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शाम-ए-फ़िराक़ अब ना पूछ आई और आ के टल गई
فیض احمد فیض द्वारा
شام فراق اب نہ پوچھ آئی اور آ کے ٹل گئی
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तुम अपनी याद से कह दो न जाए छोड़ के दिल
قمر جلالوی द्वारा
تم اپنی یاد سے کہہ دو نہ جائے چھوڑ کے دل
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अगरचे कोई भी अंधा नहीं था
Amjad Islam Amjad द्वारा
اگرچہ کوئی بھی اندھا نہیں تھا
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सब्ज़ मौसम की ख़बर ले के हवा आई हो
परवीन शाकिर द्वारा
سبز موسم کی خبر لے کے ہوا آئی ہو
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ज़िक्र भी उस से क्या भला मेरा
जौन एलिया द्वारा
ذکر بھی اس سے کیا بھلا میرا
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याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िर-ए-शब
فیض احمد فیض द्वारा
یاد کا پھر کوئی دروازہ کھلا آخر شب
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दिल गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
دل گرفتہ ہی سہی بزم سجا لی جائے
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लहू में तैरते फिरते मलाल से कुछ हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
لہو میں تیرتے پھرتے ملال سے کچھ ہیں
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रुकी हुई है अभी तक बहार आँखों में
परवीन शाकिर द्वारा
رکی ہوئی ہے ابھی تک بہار آنکھوں میں
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यह चश्म आईना-दार-ए-रू थी किसू की
मीर तक़ी मीर द्वारा
یہ چشم آئینہ دار رو تھی کسو کی
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सीन-ओ-दिल हसरतों से छा गया
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
سینہ و دل حسرتوں سے چھا گیا
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समुंदरों के उधर से कोई सदा आई
परवीन शाकिर द्वारा
سمندروں کے ادھر سے کوئی صدا آئی
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जौन एलिया द्वारा
کتنے عیش سے رہتے ہوں گے کتنے اتراتے ہوں گے
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उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس کو جدا ہوئے بھی زمانہ بہت ہوا
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करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे
अहमद फ़राज़ द्वारा
کروں نہ یاد مگر کس طرح بھلاؤں اسے
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