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क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम
قرض نگاہ یار ادا کر چکے ہیں ہم
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या रब कोई हो इश्क़ का बीमार न होवे
یا رب کوئی ہو عشق کا بیمار نہ ہووے
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आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
آنکھ سے دور نہ ہو دل سے اتر جائے گا
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खुद को तरें मयार से घट कर नहीं देखा
خود کو ترے معیار سے گھٹ کر نہیں دیکھا
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जिस्म शोला है जभी जामा-ए-सादा पहना
جسم شعلہ ہے جبھی جامۂ سادہ پہنا
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