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क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम
فیض احمد فیض द्वारा
قرض نگاہ یار ادا کر چکے ہیں ہم
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या रब कोई हो इश्क़ का बीमार न होवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
یا رب کوئی ہو عشق کا بیمار نہ ہووے
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आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
अहमद फ़राज़ द्वारा
آنکھ سے دور نہ ہو دل سے اتر جائے گا
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खुद को तरें मयार से घट कर नहीं देखा
अहमद फ़राज़ द्वारा
خود کو ترے معیار سے گھٹ کر نہیں دیکھا
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जिस्म शोला है जभी जामा-ए-सादा पहना
अहमद फ़राज़ द्वारा
جسم شعلہ ہے جبھی جامۂ سادہ پہنا
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अफ़ई की तरह डसने लगी मौज-ए-नफ़स भी
अहमद फ़राज़ द्वारा
افعی کی طرح ڈسنے لگی موج نفس بھی
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ये मैं भी क्या हूँ उसे भूल कर उसी का रहा
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ میں بھی کیا ہوں اسے بھول کر اسی کا رہا
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