ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
ज़ख़्म-ए-दिल
सभी
10
अशआर
0
ग़ज़ल
10
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
लख़्त-ए-जिगर तो अपने यक लख़्त रो चुका था
मीर तक़ी मीर द्वारा
لخت جگر تو اپنے یک لخت رو چکا تھا
0
क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला
परवीन शाकिर द्वारा
کیا کرے میری مسیحائی بھی کرنے والا
0
क्या बुलबुल असीर है बे बाल-ओ-पर कि हम
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا بلبل اسیر ہے بے بال و پر کہ ہم
0
ग़मज़े ने उस के चोरी में दिल की हुनर किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
غمزے نے اس کے چوری میں دل کی ہنر کیا
0
क्यों न हम अहद-ए-रफ़ाक़त को भुलाने लग जाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
کیوں نہ ہم عہد رفاقت کو بھلانے لگ جائیں
0
कहे है कोह-कन कर फ़िक्र मेरी ख़स्ता-हाली में
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہے ہے کوہ کن کر فکر میری خستہ حالی میں
0
ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते
Amjad Islam Amjad द्वारा
یہ اور بات ہے تجھ سے گلا نہیں کرتے
0
मुवा मैं सजदे में पर नक़्श मेरा बार रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
موا میں سجدے میں پر نقش میرا بار رہا
0
मानिंद-ए-शम्अ-ए-मजलिस-ए-शब अश्कबार पाया
मीर तक़ी मीर द्वारा
مانند شمع مجلس شب اشکبار پایا
0
तड़पना भी देखा न बिस्मिल का अपने
मीर तक़ी मीर द्वारा
تڑپنا بھی دیکھا نہ بسمل کا اپنے
कवियों की सूची
कवियों
और जानें