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कुछ मौज-ए-हवा-ए-पेचां ऐ मीर नज़र आई
मीर तक़ी मीर द्वारा
کچھ موج ہوا پیچاں اے میرؔ نظر آئی
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मुंतज़िर कब से तहय्युर है तेरी तक़रीर का
अहमद फ़राज़ द्वारा
منتظر کب سے تحیر ہے تری تقریر کا
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ऐसे चुप हैं कि ये मंज़िल भी कड़ी हो जैसे
अहमद फ़राज़ द्वारा
ایسے چپ ہیں کہ یہ منزل بھی کڑی ہو جیسے
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अब्रू तो दिखा दीजिए शमशीर से पहले
قمر جلالوی द्वारा
ابرو تو دکھا دیجئے شمشیر سے پہلے
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रिदा-ए-ज़ख़्म हर गुल-पैरहन पहने हुए है
अहमद फ़राज़ द्वारा
ردائے زخم ہر گل پیرہن پہنے ہوئے ہے
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मौसम-ए-गुल आया है यारो कुछ मेरी तदबीर करो
मीर तक़ी मीर द्वारा
موسم گل آیا ہے یارو کچھ میری تدبیر کرو
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क़ैद में गुज़रेगी जो उम्र बड़े काम की थी
परवीन शाकिर द्वारा
قید میں گزرے گی جو عمر بڑے کام کی تھی
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तुझे क्या नासिहा अहबाब खुद समझाए जाते हैं
قمر جلالوی द्वारा
تجھے کیا ناصحا احباب خود سمجھائے جاتے ہیں
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