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हटी ज़ुल्फ़ उनके चेहरे से मगर आहिस्ता आहिस्ता
قمر جلالوی द्वारा
ہٹی زلف ان کے چہرے سے مگر آہستہ آہستہ
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अगर छोटा भी इस से आइना-ख़ाना तो क्या होगा
قمر جلالوی द्वारा
اگر چھوٹا بھی اس سے آئنہ خانہ تو کیا ہوگا
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लाغر इतना हूँ कि गर तू बज़्म में जा दे मुझे
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
لاغر اتنا ہوں کہ گر تو بزم میں جا دے مجھے
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मुझ को दयार-ए-ग़ैर में मारा वतन से दूर
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
مجھ کو دیار غیر میں مارا وطن سے دور
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ख़ुश क़दाँ जब सवार होते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوش قداں جب سوار ہوتے ہیں
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बू कि हो सू-ए-बाग़ निकले है
मीर तक़ी मीर द्वारा
بو کہ ہو سوئے باغ نکلے ہے
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क्या हो गया है गेसु-ए-ख़म-दार को तेरे
जौन एलिया द्वारा
کیا ہو گیا ہے گیسوئے خم دار کو ترے
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क़यामत हैं ये चुस्पाँ जामे वाले
मीर तक़ी मीर द्वारा
قیامت ہیں یہ چسپاں جامے والے
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