Ahmad Faraz — Poet

अहमद फ़राज़

1931 — 2009

अहमद फ़राज़ जदीद उर्दू ग़ज़ल के सबसे मक़बूल रूमानी शायर हैं, जिन्होंने अपनी शायरी में क्लासिकी रिवायत और जदीद खयालात को मिलाया, और तानाशाही के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की।

अहमद फ़राज़ की शायरी

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رنجش ہی سہی دل ہی دکھانے کے لیے آ آ پھر سے مجھے چھوڑ کے جانے کے لیے آ

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

— अहमद फ़राज़
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