अहमद फ़राज़ जदीद उर्दू ग़ज़ल के सबसे मक़बूल रूमानी शायर हैं, जिन्होंने अपनी शायरी में क्लासिकी रिवायत और जदीद खयालात को मिलाया, और तानाशाही के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की।
رنجش ہی سہی دل ہی دکھانے کے لیے آ آ پھر سے مجھے چھوڑ کے جانے کے لیے آ
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
और जानें