عشق اک میرؔ بھاری پتھر ہے
کب یہ تجھ ناتواں سے اٹھتا ہے

इश्क़ इक मीर भारी पत्थर है
कब यह तुझ ना-तवाँ से उठता है

— मीर तक़ी मीर द्वारा

ग़ज़ल देखें →


तब्सिरे

तब्सिरे लोड हो रहे हैं…