یاں کے سپید و سیہ میں ہم کو دخل جو ہے سو اتنا ہے
رات کو رو رو صبح کیا یا دن کو جوں توں شام کیا

याँ के सुफ़ैद-ओ-सियह में हम को दख़ल जो है सो इतना है
रात को رو रो सुबह किया या दिन को जूँ तूँ शाम किया

— मीर तक़ी मीर द्वारा

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