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इस अहद में इलाही मोहब्बत को क्या हुआ
اس عہد میں الٰہی محبت کو کیا ہوا
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शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
شفق کی راکھ میں جل بجھ گیا ستارۂ شام
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अब जो कोई पूछे भी तो इससे क्या शर्ह-ए-हालात करें
اب جو کوئی پوچھے بھی تو اس سے کیا شرح حالات کریں
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शोला था जल बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो
شعلہ تھا جل بجھا ہوں ہوائیں مجھے نہ دو
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शब-ए-दर्द-ओ-ग़म से अर्सा मेरे जी पे तंग था
شب درد و غم سے عرصہ مرے جی پہ تنگ تھا
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