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आह-ए-सर्द

सभी 8अशआर 0ग़ज़ल 8
ग़ज़ल8
इस अहद में इलाही मोहब्बत को क्या हुआ
اس عہد میں الٰہی محبت کو کیا ہوا
शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
شفق کی راکھ میں جل بجھ گیا ستارۂ شام
अब जो कोई पूछे भी तो इससे क्या शर्ह-ए-हालात करें
اب جو کوئی پوچھے بھی تو اس سے کیا شرح حالات کریں
शोला था जल बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो
شعلہ تھا جل بجھا ہوں ہوائیں مجھے نہ دو
शब-ए-दर्द-ओ-ग़म से अर्सा मेरे जी पे तंग था
شب درد و غم سے عرصہ مرے جی پہ تنگ تھا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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