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इस अहद में इलाही मोहब्बत को क्या हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس عہد میں الٰہی محبت کو کیا ہوا
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शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
فیض احمد فیض द्वारा
شفق کی راکھ میں جل بجھ گیا ستارۂ شام
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अब जो कोई पूछे भी तो इससे क्या शर्ह-ए-हालात करें
فیض احمد فیض द्वारा
اب جو کوئی پوچھے بھی تو اس سے کیا شرح حالات کریں
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शोला था जल बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो
अहमद फ़राज़ द्वारा
شعلہ تھا جل بجھا ہوں ہوائیں مجھے نہ دو
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शब-ए-दर्द-ओ-ग़म से अर्सा मेरे जी पे तंग था
मीर तक़ी मीर द्वारा
شب درد و غم سے عرصہ مرے جی پہ تنگ تھا
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सारा शहर बिलकता है
अहमद फ़राज़ द्वारा
سارا شہر بلکتا ہے
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ऐ ख़ुदा जो भी मुझे पंद-ए-शकीबाई दे
अहमद फ़राज़ द्वारा
اے خدا جو بھی مجھے پند شکیبائی دے
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सब लोग लिए संग-ए-मलामत निकल आए
अहमद फ़राज़ द्वारा
سب لوگ لیے سنگ ملامت نکل آئے
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