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शेर के पर्दे में मैं ने ग़म सुनाया है बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
شعر کے پردے میں میں نے غم سنایا ہے بہت
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हम से कुछ आगे ज़माने में हुआ क्या क्या कुछ
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم سے کچھ آگے زمانے میں ہوا کیا کیا کچھ
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न गनवाओ नावक-ए-नीम-कश दिल रेज़ा रेज़ा गनवा दिया
فیض احمد فیض द्वारा
نہ گنواؤ ناوک نیم کش دل ریزہ ریزہ گنوا دیا
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यह जफ़ा-ए-ग़म का चारा वो नजात-ए-दिल का आलम
فیض احمد فیض द्वारा
یہ جفائے غم کا چارہ وہ نجات دل کا عالم
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अगर छोटा भी इस से आइना-ख़ाना तो क्या होगा
قمر جلالوی द्वारा
اگر چھوٹا بھی اس سے آئنہ خانہ تو کیا ہوگا
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उस का ख़याल चश्म से शब-ए-ख़्वाब ले गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کا خیال چشم سے شب خواب لے گیا
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तुझे पुकारा है बे-इरादा
فیض احمد فیض द्वारा
تجھے پکارا ہے بے ارادہ
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जो इस शोर से मीर रोता रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو اس شور سے میرؔ روتا رہے گا
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ग़म उस को सारी रात सुनाया तो क्या हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
غم اس کو ساری رات سنایا تو کیا ہوا
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जग में आ कर इधर उधर देखा
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
جگ میں آ کر ادھر ادھر دیکھا
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आह और अश्क ही सदा है याँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ اور اشک ہی سدا ہے یاں
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दर्द-ओ-अंदोह में ठहरा जो रहा मैं ही हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
درد و اندوہ میں ٹھہرا جو رہا میں ہی ہوں
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मशहूर हैं दिलों की मिरे बे-क़रारियाँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
مشہور ہیں دلوں کی مرے بے قراریاں
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हम पर तुम्हारी चाह का इलज़ाम ही तो है
فیض احمد فیض द्वारा
ہم پر تمہاری چاہ کا الزام ہی تو ہے
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दुहाई है तरी तो ले ख़बर ओ ला-मकाँ वाले
قمر جلالوی द्वारा
دہائی ہے تری تو لے خبر او لا مکاں والے
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मुए सहते सहते जफ़ा-कारियाँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
موے سہتے سہتے جفا کاریاں
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बनी थी कुछ एक उस से मुद्दत के बाद
मीर तक़ी मीर द्वारा
بنی تھی کچھ اک اس سے مدت کے بعد
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न रुकते हैं आँसू न थमते हैं नाले
قمر جلالوی द्वारा
نہ رکتے ہیں آنسو نہ تھمتے ہیں نالے
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रात गुज़रे है मुझे नज़्अ में रोते रोते
मीर तक़ी मीर द्वारा
رات گزرے ہے مجھے نزع میں روتے روتے
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वहशत-ए-दिल सिला-ए-आबला पाई ले ले
अहमद फ़राज़ द्वारा
وحشت دل صلۂ آبلہ پائی لے لے
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