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तड़प उठूँ भी तो ज़ालिम तेरी दुहाई न दूँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
تڑپ اٹھوں بھی تو ظالم تری دہائی نہ دوں
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नाले का आज दिल से फिर लब तलक गुज़र है
मीर तक़ी मीर द्वारा
نالے کا آج دل سے پھر لب تلک گزر ہے
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आह को समझे हो क्या दिल से अगर हो जाएगी
قمر جلالوی द्वारा
آہ کو سمجھے ہو کیا دل سے اگر ہو جائے گی
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शेख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की
فیض احمد فیض द्वारा
شیخ صاحب سے رسم و راہ نہ کی
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हम हैं मज्रूः माजरा है ये
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم ہیں مجروح ماجرا ہے یہ
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मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फ़साना सुनाता रहा दम निकलते निकलते
قمر جلالوی द्वारा
مریض محبت انہیں کا فسانہ سناتا رہا دم نکلتے نکلتے
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दिल की तरफ़ कुछ आह से दिल का लगाओ है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل کی طرف کچھ آہ سے دل کا لگاؤ ہے
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सवाल छोड़ कि हालत ये क्यों बनाई है
قمر جلالوی द्वारा
سوال چھوڑ کہ حالت یہ کیوں بنائی ہے
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आख़िरी बार आह कर ली है
जौन एलिया द्वारा
آخری بار آہ کر لی ہے
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ये रोज़-ए-हश्र का और शिकवा-ए-वफ़ा के लिये
قمر جلالوی द्वारा
یہ روز حشر کا اور شکوۂ وفا کے لئے
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उन के जाते ही यह वहशत का असर देखा किये
قمر جلالوی द्वारा
ان کے جاتے ہی یہ وحشت کا اثر دیکھا کئے
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किसी सूरत सहर नहीं होती
قمر جلالوی द्वारा
کسی صورت سحر نہیں ہوتی
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हम इस गली का बड़ा एहतराम करते हैं
قمر جلالوی द्वारा
ہم اس گلی کا بڑا احترام کرتے ہیں
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तुम्हें भी चाहिए है कुछ तो पास चाहत का
मीर तक़ी मीर द्वारा
تمہیں بھی چاہیے ہے کچھ تو پاس چاہت کا
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गए जी से छोटे बुतों की जफ़ा से
मीर तक़ी मीर द्वारा
گئے جی سے چھوٹے بتوں کی جفا سے
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आह के तईं दिल हैरान-ओ-ख़फ़ा को सौंपा
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ کے تیں دل حیران و خفا کو سونپا
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गुज़रा बना-ए-चर्ख़ से नाला पगाह का
मीर तक़ी मीर द्वारा
گزرا بنائے چرخ سے نالہ پگاہ کا
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हम ने किस रात नाला सर न किया
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ہم نے کس رات نالہ سر نہ کیا
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वाँ उसको हौल-ए-दिल है तो याँ मैं हूँ शर्म-सार
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
واں اس کو ہول دل ہے تو یاں میں ہوں شرم سار
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दुआ का टूटा हुआ हर्फ़ सर्द आह में है
परवीन शाकिर द्वारा
دعا کا ٹوٹا ہوا حرف سرد آہ میں ہے
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