Waan Usko Haul-e-Dil Hai To Yaan Main Hoon Sharm-saar
واں اس کو ہول دل ہے تو یاں میں ہوں شرم سار
वाँ उसको हौल-ए-दिल है तो याँ मैं हूँ शर्म-सार
ग़ज़ल
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मिर्ज़ा ग़ालिब1797–1869
शास्त्रीय
मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू के वो अज़ीम और मशहूर शायर हैं, जिन्होंने क्लासिकी और जदीद दौर के बीच एक पुल का काम किया, और जिनके शेर आज भी इंसानी ज़िन्दगी के हर पहलू को बयान करते हैं।
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