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हस्ती अपनी हबाब की सी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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मुँह तका ही करे है जिस तिस का
मीर तक़ी मीर द्वारा
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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पयाम आए हैं उस यार-ए-बे-वफ़ा के मुझे
अहमद फ़राज़ द्वारा
پیام آئے ہیں اس یار بے وفا کے مجھے
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फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाए
فیض احمد فیض द्वारा
پھر آئینۂ عالم شاید کہ نکھر جائے
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ख़त्म-ए-शब क़िस्सा-ए-मुख़्तसर न हुई
قمر جلالوی द्वारा
ختم شب قصۂ مختصر نہ ہوئی
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इश्क़ ऐसा अजीब दरिया है
Amjad Islam Amjad द्वारा
عشق ایسا عجیب دریا ہے
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दिल साफ़ हो तो जल्वा गह-ए-यार क्यों न हो
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل صاف ہو تو جلوہ گہہ یار کیوں نہ ہو
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ब नाला हासिल-ए-दिल-बस्तगी फ़राहम कर
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
بہ نالہ حاصل دل بستگی فراہم کر
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आईनों में अक्स न हों तो हैरत रहती है
Amjad Islam Amjad द्वारा
آئینوں میں عکس نہ ہوں تو حیرت رہتی ہے
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किसी की आँख में ख़ुद को तलाश करना है
Amjad Islam Amjad द्वारा
کسی کی آنکھ میں خود کو تلاش کرنا ہے
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परदे में इस बदन के छुपें राज़ किस तरह
Amjad Islam Amjad द्वारा
پردے میں اس بدن کے چھپیں راز کس طرح
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कब से हम लोग इस भँवर में हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
کب سے ہم لوگ اس بھنور میں ہیں
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वाँ उसको हौल-ए-दिल है तो याँ मैं हूँ शर्म-सार
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
واں اس کو ہول دل ہے تو یاں میں ہوں شرم سار
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दिल पुर ख़ूँ है यहाँ तुझ को गुमाँ है शीशा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل پر خوں ہے یہاں تجھ کو گماں ہے شیشہ
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