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उम्र भर हम रहे शराबी से
मीर तक़ी मीर द्वारा
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
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चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
فیض احمد فیض द्वारा
چاند نکلے کسی جانب تری زیبائی کا
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है वजह कोई ख़ास मेरी आँख जो नम है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے وجہ کوئی خاص مری آنکھ جو نم ہے
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आँख उठी मोहब्बत ने अंगड़ाई ली
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھ اٹھی محبت نے انگڑائی لی
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लब तेरे लअल-ए-नाब हैं दोनों
मीर तक़ी मीर द्वारा
لب ترے لعل ناب ہیں دونوں
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कुछ दिन से इंतज़ार-ए-सवाल-ए-दीगर में है
فیض احمد فیض द्वारा
کچھ دن سے انتظار سوال دگر میں ہے
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आँखों में नमी आई चेहरे पे मलाल आया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھوں میں نمی آئی چہرے پہ ملال آیا
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सुबह की आज जो रंगत है वह पहले तो न थी
فیض احمد فیض द्वारा
صبح کی آج جو رنگت ہے وہ پہلے تو نہ تھی
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जब भी आँखों में तिरे वस्ल का लम्हा चमका
Amjad Islam Amjad द्वारा
جب بھی آنکھوں میں ترے وصل کا لمحہ چمکا
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हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तो
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہوئی ہے شام تو آنکھوں میں بس گیا پھر تو
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रुकी हुई है अभी तक बहार आँखों में
परवीन शाकिर द्वारा
رکی ہوئی ہے ابھی تک بہار آنکھوں میں
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तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार जब से है
فیض احمد فیض द्वारा
تری امید ترا انتظار جب سے ہے
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तलवार ग़र्क़-ए-ख़ूँ है आँखें गुलाबियाँ हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
تلوار غرق خوں ہے آنکھیں گلابیاں ہیں
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