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हस्ती अपनी हबाब की सी है
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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मेरी लौ लगी है तुझ से ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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अश्क आँखों में कब नहीं आता
اشک آنکھوں میں کب نہیں آتا
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मुँह तका ही करे है जिस तिस का
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा
غم رہا جب تک کہ دم میں دم رہا
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