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आँसू

सभी 55अशआर 0ग़ज़ल 55
ग़ज़ल55
बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़लाक से है
بخت سے کوئی شکایت ہے نہ افلاک سے ہے
नाले का आज दिल से फिर लब तलक गुज़र है
نالے کا آج دل سے پھر لب تلک گزر ہے
जल्वा जो तेरे रुख़ का एहसास में ढल जाए
جلوہ جو ترے رخ کا احساس میں ڈھل جائے
ख़बर ही नहीं कैसे अंगड़ाई ले कर निगाहें उठाए कि साग़र उठाए
خبر ہی نہیں کیسے انگڑائی لے کر نگاہیں اٹھائے کہ ساغر اٹھائے
लख़्त-ए-जिगर तो अपने यक लख़्त रो चुका था
لخت جگر تو اپنے یک لخت رو چکا تھا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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