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हस्ती अपनी हबाब की सी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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मेरी लौ लगी है तुझ से ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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अश्क आँखों में कब नहीं आता
मीर तक़ी मीर द्वारा
اشک آنکھوں میں کب نہیں آتا
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मुँह तका ही करे है जिस तिस का
मीर तक़ी मीर द्वारा
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
غم رہا جب تک کہ دم میں دم رہا
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हसरत-ए-दीद में गुज़रां हैं ज़माने कब से
فیض احمد فیض द्वारा
حسرتِ دید میں گزراں ہیں زمانے کب سے
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माइल-ब-करम मुझ पर हो जाएं तो अच्छा हो
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مائل بہ کرم مجھ پر ہو جائیں تو اچھا ہو
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आवेगी मेरी क़ब्र से आवाज़ मेरे बाद
मीर तक़ी मीर द्वारा
آوے گی میری قبر سے آواز میرے بعد
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जिन जिन को था यह इश्क़ का आज़ार मर गए
मीर तक़ी मीर द्वारा
جن جن کو تھا یہ عشق کا آزار مر گئے
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है वजह कोई ख़ास मेरी आँख जो नम है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے وجہ کوئی خاص مری آنکھ جو نم ہے
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गरचह कब देखते हो पर देखो
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرچہ کب دیکھتے ہو پر دیکھو
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तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
تمہاری یاد کے جب زخم بھرنے لگتے ہیں
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लज़्ज़त से नहीं ख़ाली जानों का खपा जाना
मीर तक़ी मीर द्वारा
لذت سے نہیں خالی جانوں کا کھپا جانا
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ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
زخم جھیلے داغ بھی کھائے بہت
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कुछ मौज-ए-हवा-ए-पेचां ऐ मीर नज़र आई
मीर तक़ी मीर द्वारा
کچھ موج ہوا پیچاں اے میرؔ نظر آئی
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ऐ दोस्त कोई मुझ सा रुस्वा न हुआ होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
اے دوست کوئی مجھ سا رسوا نہ ہوا ہوگا
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काश उठें हम भी गुनाहगारों के बीच
मीर तक़ी मीर द्वारा
کاش اٹھیں ہم بھی گنہ گاروں کے بیچ
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आँखों में नमी आई चेहरे पे मलाल आया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھوں میں نمی آئی چہرے پہ ملال آیا
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बरश्काल-ए-गिर्या-ए-आशिक़ है देखा चाहिए
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
برشکال گریۂ عاشق ہے دیکھا چاہیے
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क्या मुवाफ़िक़ हो दवा इश्क़ के बीमार के साथ
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا موافق ہو دوا عشق کے بیمار کے ساتھ
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