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आँसू

सभी 55अशआर 0ग़ज़ल 55
ग़ज़ल55
कहते हैं बहार आई गुल फूल निकलते हैं
کہتے ہیں بہار آئی گل پھول نکلتے ہیں
तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ साथ
تیرا گھر اور میرا جنگل بھیگتا ہے ساتھ ساتھ
डसने लगे हैं ख़्वाब मगर किस से बोलिए
ڈسنے لگے ہیں خواب مگر کس سے بولئے
दामान-ए-कोह में जो मैं ढाढ़ मार रोया
دامان کوہ میں جو میں ڈاڑھ مار رویا
मुश्किल है होना रोकश रुख़्सार की झलक के
مشکل ہے ہونا روکش رخسار کی جھلک کے
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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