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कहते हैं बहार आई गुल फूल निकलते हैं
کہتے ہیں بہار آئی گل پھول نکلتے ہیں
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तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ साथ
تیرا گھر اور میرا جنگل بھیگتا ہے ساتھ ساتھ
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डसने लगे हैं ख़्वाब मगर किस से बोलिए
ڈسنے لگے ہیں خواب مگر کس سے بولئے
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दामान-ए-कोह में जो मैं ढाढ़ मार रोया
دامان کوہ میں جو میں ڈاڑھ مار رویا
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मुश्किल है होना रोकश रुख़्सार की झलक के
مشکل ہے ہونا روکش رخسار کی جھلک کے
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