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आशिक़ी

सभी 105अशआर 0ग़ज़ल 105
ग़ज़ल105
बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
بارے دنیا میں رہو غم زدہ یا شاد رہو
वह और होंगे जिन को हरम की तलाश है
وہ اور ہوں گے جن کو حرم کی تلاش ہے
आज़-ए-अहल-ए-सितम की बात करो
عجز اہل ستم کی بات کرو
न किसी पे ज़ख़्म अयां कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है
نہ کسی پہ زخم عیاں کوئی نہ کسی کو فکر رفو کی ہے
न अब रक़ीब न नासेह न ग़म-गुसार कोई
نہ اب رقیب نہ ناصح نہ غم گسار کوئی
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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