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आशिक़ी

सभी 105अशआर 0ग़ज़ल 105
ग़ज़ल105
यक-ब-यक शोरिश-ए-फ़ुग़ां की तरह
یک بیک شورش فغاں کی طرح
रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा
رہتا ہے ہڈیوں سے مری جو ہما لگا
इश्क़ हरचंद मिरी जान सदा खाता है
عشق ہرچند مری جان سدا کھاتا ہے
क्या लड़के दिल्ली के हैं अय्यार और नट खट
کیا لڑکے دلی کے ہیں عیار اور نٹ کھٹ
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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