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उम्र भर हम रहे शराबी से
मीर तक़ी मीर द्वारा
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
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हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही
فیض احمد فیض द्वारा
نہیں نگاہ میں منزل تو جستجو ہی سہی
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चमन में गुल ने जो कल दावा-ए-जमाल किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
چمن میں گل نے جو کل دعوی جمال کیا
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ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
غم رہا جب تک کہ دم میں دم رہا
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चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
فیض احمد فیض द्वारा
چاند نکلے کسی جانب تری زیبائی کا
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जब नाम तेरा लीजिए तब चश्म भर आवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب نام ترا لیجیے تب چشم بھر آوے
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तेरा रुख़ मुख़तत क़ुरआन है हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
تیرا رخ مخطط قرآن ہے ہمارا
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न देर में न हरम में जबीं झुकी होगी
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
نہ دیر میں نہ حرم میں جبیں جھکی ہوگی
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रफ़्तगां में जहां के हम भी हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
رفتگاں میں جہاں کے ہم بھی ہیں
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माइल-ब-करम मुझ पर हो जाएं तो अच्छा हो
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مائل بہ کرم مجھ پر ہو جائیں تو اچھا ہو
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हुस्न मरहून जोश-ए-बादः-ए-नाज़
فیض احمد فیض द्वारा
حسن مرہون جوش بادۂ ناز
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जब तक मरे होंटों पे तेरा नाम रहेगा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جب تک مرے ہونٹوں پہ ترا نام رہے گا
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ऐ सनम देर न कर अंजुमन आरा हो जा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم دیر نہ کر انجمن آرا ہو جا
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यह तमन्ना है कि इस तरह मुसलमान होता
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
یہ تمنا ہے کہ اس طرح مسلماں ہوتا
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है वजह कोई ख़ास मेरी आँख जो नम है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے وجہ کوئی خاص مری آنکھ جو نم ہے
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जिन जिन को था यह इश्क़ का आज़ार मर गए
मीर तक़ी मीर द्वारा
جن جن کو تھا یہ عشق کا آزار مر گئے
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किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आशना नहीं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
کس کو سناؤں حال غم کوئی غم آشنا نہیں
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चलते हो तो चमन को चलिये कहते हैं कि बहारां है
मीर तक़ी मीर द्वारा
چلتے ہو تو چمن کو چلئے کہتے ہیں کہ بہاراں ہے
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जब तक मिरी निगाह में तेरा जमाल है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جب تک مری نگاہ میں تیرا جمال ہے
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