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उम्र भर हम रहे शराबी से
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
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हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही
نہیں نگاہ میں منزل تو جستجو ہی سہی
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चमन में गुल ने जो कल दावा-ए-जमाल किया
چمن میں گل نے جو کل دعوی جمال کیا
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ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा
غم رہا جب تک کہ دم میں دم رہا
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