ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
बे-सबाती
सभी
94
अशआर
0
ग़ज़ल
94
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
ज़िंदगी क्या है इक कहानी है
जौन एलिया द्वारा
زندگی کیا ہے اک کہانی ہے
0
दिल गुमाँ था गुमानियाँ थे हम
जौन एलिया द्वारा
دل گماں تھا گمانیاں تھے ہم
0
न तेरा क़ुर्ब न बादा है क्या क्या जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ تیرا قرب نہ بادہ ہے کیا کیا جائے
0
फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ में सैर जो की हमने जाए-गुल
मीर तक़ी मीर द्वारा
فصل خزاں میں سیر جو کی ہم نے جائے گل
0
चराग़ राह बुझा क्या कि रहनुमा भी गया
परवीन शाकिर द्वारा
چراغ راہ بجھا کیا کہ رہنما بھی گیا
0
वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
परवीन शाकिर द्वारा
وہ تو خوش بو ہے ہواؤں میں بکھر جائے گا
0
कोई हुआ न रोकश टुक मेरी चश्म-ए-तर से
मीर तक़ी मीर द्वारा
کوئی ہوا نہ روکش ٹک میری چشم تر سے
0
ख़त से वो ज़ोर-ए-सफ़ाई-ए-हुस्n अब कम हो गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
خط سے وہ زور صفائے حسن اب کم ہو گیا
0
हुसूल काम का दिल-ख़्वाह याँ हुआ भी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
حصول کام کا دل خواہ یاں ہوا بھی ہے
0
बे-दिली क्या यूँ ही दिन गुज़र जाएँगे
जौन एलिया द्वारा
بے دلی کیا یوں ہی دن گزر جائیں گے
0
नहीं निभाई ख़ुशी से ग़मी को छोड़ दिया
जौन एलिया द्वारा
نہیں نباہی خوشی سے غمی کو چھوڑ دیا
0
तोहमत चंद अपने ज़िम्मे धर चले
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
تہمت چند اپنے ذمے دھر چلے
0
शब ख़ुमार-ए-शौक़-ए-साक़ी रस्तख़ेज़ अंदाज़ा था
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
شب خمار شوق ساقی رستخیز اندازہ تھا
0
कोई दम भी मैं कब अंदर रहा हूँ
जौन एलिया द्वारा
کوئی دم بھی میں کب اندر رہا ہوں
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें