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ग़ज़ल4
बिछड़ा है जो इक बार तो मिलते नहीं देखा
بچھڑا ہے جو اک بار تو ملتے نہیں دیکھا
बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं
بڑا احسان ہم فرما رہے ہیں
ख़याल-ओ-ख़्वाब हुआ बर्ग-ओ-बार का मौसम
خیال و خواب ہوا برگ و بار کا موسم
वो जो था वो कभी मिला ही नहीं
وہ جو تھا وہ کبھی ملا ہی نہیں
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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