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बिछड़ा है जो इक बार तो मिलते नहीं देखा
परवीन शाकिर द्वारा
بچھڑا ہے جو اک بار تو ملتے نہیں دیکھا
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बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं
जौन एलिया द्वारा
بڑا احسان ہم فرما رہے ہیں
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ख़याल-ओ-ख़्वाब हुआ बर्ग-ओ-बार का मौसम
परवीन शाकिर द्वारा
خیال و خواب ہوا برگ و بار کا موسم
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वो जो था वो कभी मिला ही नहीं
जौन एलिया द्वारा
وہ جو تھا وہ کبھی ملا ہی نہیں
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