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सभी 34अशआर 0ग़ज़ल 34
ग़ज़ल34
जीते जी कूचए-दिल-दार से जाया न गया
جیتے جی کوچۂ دل دار سے جایا نہ گیا
दिल में अब यूं तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
دل میں اب یوں ترے بھولے ہوئے غم آتے ہیں
जब रोने बैठता हूँ तब क्या कसर रहे है
جب رونے بیٹھتا ہوں تب کیا کسر رہے ہے
माइल-ब-करम मुझ पर हो जाएं तो अच्छा हो
مائل بہ کرم مجھ پر ہو جائیں تو اچھا ہو
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
کہاں آ کے رکنے تھے راستے کہاں موڑ تھا اسے بھول جا
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