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फिर उसी रहगुज़र पर शायद
अहमद फ़राज़ द्वारा
پھر اسی رہ گزار پر شاید
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वो दुश्मन-ए-जाँ जाँ से प्यारा भी कभी था
अहमद फ़राज़ द्वारा
وہ دشمن جاں جان سے پیارا بھی کبھی تھا
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जो भी दरून-ए-दिल है वो बाहर न आएगा
अहमद फ़राज़ द्वारा
جو بھی درون دل ہے وہ باہر نہ آئے گا
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कशीदा सर से तवक़्क़ो अबस झुकाव की थी
अहमद फ़राज़ द्वारा
کشیدہ سر سے توقع عبث جھکاؤ کی تھی
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बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या
जौन एलिया द्वारा
بہت دل کو کشادہ کر لیا کیا
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करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे
अहमद फ़राज़ द्वारा
کروں نہ یاد مگر کس طرح بھلاؤں اسے
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तुझ से बिछड़ के हम भी मुक़द्दर के हो गए
अहमद फ़राज़ द्वारा
تجھ سے بچھڑ کے ہم بھی مقدر کے ہو گئے
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क्यों न हम अहद-ए-रफ़ाक़त को भुलाने लग जाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
کیوں نہ ہم عہد رفاقت کو بھلانے لگ جائیں
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न शब-ओ-रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ شب و روز ہی بدلے ہیں نہ حال اچھا ہے
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कब उसका विसाल चाहिए था
जौन एलिया द्वारा
کب اس کا وصال چاہیے تھا
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यूँ तो पहले भी हुए उस से कई बार जुदा
अहमद फ़राज़ द्वारा
یوں تو پہلے بھی ہوئے اس سے کئی بار جدا
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बे-नियाज़-ए-ग़म-ए-पैमान-ए-वफ़ा हो जाना
अहमद फ़राज़ द्वारा
بے نیاز غم پیمان وفا ہو جانا
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इश्क़ नशा है न जादू जो उतर भी जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
عشق نشہ ہے نہ جادو جو اتر بھی جائے
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ज़िंदगी बे-साइबाँ बे-घर कहीं ऐसी न थी
परवीन शाकिर द्वारा
زندگی بے سائباں بے گھر کہیں ایسی نہ تھی
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