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दर्द

सभी 123अशआर 0ग़ज़ल 123
ग़ज़ल123
अजब इक तौर है जो हम सितम ईजाद रखें
عجب اک طور ہے جو ہم ستم ایجاد رکھیں
यक-ब-यक शोरिश-ए-फ़ुग़ां की तरह
یک بیک شورش فغاں کی طرح
दिल में अब ताक़त कहाँ ख़ूँ नाबा अफ़शानी करे
دل میں اب طاقت کہاں خوں نابہ افشانی کرے
जग में कोई न टुक हँसा होगा
جگ میں کوئی نہ ٹک ہنسا ہوگا
गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का
گلا نہیں ہے ہمیں اپنی جاں گدازی کا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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