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दर्द
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मैं भी दुनिया में हूँ इक नाला-ए-परेशाँ यक जा
میں بھی دنیا میں ہوں اک نالہ پریشاں یک جا
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जो ज़िंदगी बची है उसे मत गँवाइए
جو زندگی بچی ہے اسے مت گنوائیے
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मेरे दाग़-ए-दिल वो चराग़ हैं नहीं निस्बतें जिन्हें शाम से
مرے داغ دل وہ چراغ ہیں نہیں نسبتیں جنہیں شام سے
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ये दर्द-ए-हिज्र और उस पर सहर नहीं होती
یہ درد ہجر اور اس پر سحر نہیں ہوتی
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तेरा क़ुर्ब था कि फ़िराक़ था वही तेरी जल्वा-गरी रही
ترا قرب تھا کہ فراق تھا وہی تیری جلوہ گری رہی
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