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उधर से अब्र उठ कर जो गया है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ادھر سے ابر اٹھ کر جو گیا ہے
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बातें हमारी याद रहें फिर बातें ऐसी न सुनिए गा
मीर तक़ी मीर द्वारा
باتیں ہماری یاد رہیں پھر باتیں ایسی نہ سنیے گا
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जल्वा जो तेरे रुख़ का एहसास में ढल जाए
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جلوہ جو ترے رخ کا احساس میں ڈھل جائے
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सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं
فیض احمد فیض द्वारा
سب قتل ہو کے تیرے مقابل سے آئے ہیں
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तुझे पुकारा है बे-इरादा
فیض احمد فیض द्वारा
تجھے پکارا ہے بے ارادہ
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गिला फ़ुज़ूल था अहद-ए-वफ़ा के होते हुए
अहमद फ़राज़ द्वारा
گلہ فضول تھا عہد وفا کے ہوتے ہوئے
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दिल जो है आग लगा दूँ उस को
जौन एलिया द्वारा
دل جو ہے آگ لگا دوں اس کو
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शेख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की
فیض احمد فیض द्वारा
شیخ صاحب سے رسم و راہ نہ کی
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दिल गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
دل گرفتہ ہی سہی بزم سجا لی جائے
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जिन के लिए अपने तो यूँ जान निकलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
جن کے لیے اپنے تو یوں جان نکلتے ہیں
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दिल-ए-बेताब आफ़त है बला है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل بیتاب آفت ہے بلا ہے
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क्या करूं शरह-ए-ख़स्ता जानी की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کروں شرح خستہ جانی کی
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ग़ालिब कि यह दिल-ए-ख़स्ता शब-ए-हिज्र में मर जाए
मीर तक़ी मीर द्वारा
غالب کہ یہ دل خستہ شب ہجر میں مر جائے
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सामने उस के कभी उस की सताइश नहीं की
अहमद फ़राज़ द्वारा
سامنے اس کے کبھی اس کی ستائش نہیں کی
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है हाल जाए गिर्यः जान पर आरज़ू का
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہے حال جائے گریہ جان پر آرزو کا
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दिल की तरफ़ कुछ आह से दिल का लगाओ है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل کی طرف کچھ آہ سے دل کا لگاؤ ہے
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सोज़िश-ए-दिल से मुफ़्त गुलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
سوزش دل سے مفت گلتے ہیں
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फ़िक्र है माह के जो शहर बदर करने की
मीर तक़ी मीर द्वारा
فکر ہے ماہ کے جو شہر بدر کرنے کی
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दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
जौन एलिया द्वारा
دل کی تکلیف کم نہیں کرتے
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है ग़ज़ल मीरؔ यह शफ़ाईؔ की
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہے غزل میرؔ یہ شفائیؔ کی
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