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हस्ती अपनी हबाब की सी है
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
دل جو زیر غبار اکثر تھا
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जिस सर को ग़ुरूर आज है यां ताजवरी का
جس سر کو غرور آج ہے یاں تاجوری کا
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हैरान है जबीं आज किधर सज्दा रवां है
حیراں ہے جبیں آج کدھر سجدہ روا ہے
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आ जाएँ हम नज़र जो कोई दम बहुत है यां
آ جائیں ہم نظر جو کوئی دم بہت ہے یاں
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