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हस्ती अपनी हबाब की सी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل جو زیر غبار اکثر تھا
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जिस सर को ग़ुरूर आज है यां ताजवरी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
جس سر کو غرور آج ہے یاں تاجوری کا
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हैरान है जबीं आज किधर सज्दा रवां है
فیض احمد فیض द्वारा
حیراں ہے جبیں آج کدھر سجدہ روا ہے
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आ जाएँ हम नज़र जो कोई दम बहुत है यां
मीर तक़ी मीर द्वारा
آ جائیں ہم نظر جو کوئی دم بہت ہے یاں
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ये शहर सहर ज़दा है सदा किसी की नहीं
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ شہر سحر زدہ ہے صدا کسی کی نہیں
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काश उठें हम भी गुनाहगारों के बीच
मीर तक़ी मीर द्वारा
کاش اٹھیں ہم بھی گنہ گاروں کے بیچ
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किसी जानिब से भी परचम न लहू का निकला
अहमद फ़राज़ द्वारा
کسی جانب سے بھی پرچم نہ لہو کا نکلا
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शैख़ आख़िर ये सुराही है कोई ख़ुम तो नहीं
قمر جلالوی द्वारा
شیخ آخر یہ صراحی ہے کوئی خم تو نہیں
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सुरख़ियां क्यों ढूंढ कर लाऊं फ़साने के लिए
قمر جلالوی द्वारा
سرخیاں کیوں ڈھونڈھ کر لاؤں فسانے کے لئے
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ग़ुरूर-ए-जाँ को मेरे यार बेच देते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
غرور جاں کو مرے یار بیچ دیتے ہیں
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सब क़रीने इसी दिल दार के रख देते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
سب قرینے اسی دل دار کے رکھ دیتے ہیں
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आह और अश्क ही सदा है याँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ اور اشک ہی سدا ہے یاں
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दहर भी 'मीर' तुर्फ़ा मक़्तल है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دہر بھی میرؔ طرفہ مقتل ہے
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दिल में भरा ज़ बसकि ख़याल-ए-शराब था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل میں بھرا ز بسکہ خیال شراب تھا
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जब हर एक शहर बलाओं का ठिकाना बन जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
جب ہر اک شہر بلاؤں کا ٹھکانہ بن جائے
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पुश्त-ए-पा मारी बस-कि दुनिया पर
मीर तक़ी मीर द्वारा
پشت پا ماری بسکہ دنیا پر
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ऐसा तिरा रह गुज़र न होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
ایسا ترا رہ گزر نہ ہوگا
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