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मेरी लौ लगी है तुझ से ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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कुछ मुहतसिबों की ख़लवत में कुछ वाइज़ के घर जाती है
فیض احمد فیض द्वारा
کچھ محتسبوں کی خلوت میں کچھ واعظ کے گھر جاتی ہے
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बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते
فیض احمد فیض द्वारा
بے دم ہوئے بیمار دوا کیوں نہیں دیتے
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एक परवाज़ को भी रुख़सत-ए-सय्याद नहीं
मीर तक़ी मीर द्वारा
ایک پرواز کو بھی رخصت صیاد نہیں
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मेरे संग मज़ार पर फ़रहाद
मीर तक़ी मीर द्वारा
میرے سنگ مزار پر فرہاد
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शोला था जल बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो
अहमद फ़राज़ द्वारा
شعلہ تھا جل بجھا ہوں ہوائیں مجھے نہ دو
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यूँ ही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
یوں ہی مر مر کے جئیں وقت گزارے جائیں
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मुंतज़िर कब से तहय्युर है तेरी तक़रीर का
अहमद फ़राज़ द्वारा
منتظر کب سے تحیر ہے تری تقریر کا
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ख़ामोश हो क्यों दाद-ए-जफ़ा क्यों नहीं देते
अहमद फ़राज़ द्वारा
خاموش ہو کیوں داد جفا کیوں نہیں دیتے
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अपनी मंज़िल का रास्ता भेजो
जौन एलिया द्वारा
اپنی منزل کا راستہ بھیجو
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न जाओ घर अभी तो रात है बादल भी काले हैं
قمر جلالوی द्वारा
نہ جاؤ گھر ابھی تو رات ہے بادل بھی کالے ہیں
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नक़्श बैठे है कहाँ ख़्वाहिश-ए-आज़ादी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
نقش بیٹھے ہے کہاں خواہش آزادی کا
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हो आजिज़ कि जिस्म इस क़दर ज़ोर से
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہو عاجز کہ جسم اس قدر زور سے
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दुहाई है तरी तो ले ख़बर ओ ला-मकाँ वाले
قمر جلالوی द्वारा
دہائی ہے تری تو لے خبر او لا مکاں والے
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थक गया है दिल-ए-वहशी मिरा फ़रियाद से भी
परवीन शाकिर द्वारा
تھک گیا ہے دل وحشی مرا فریاد سے بھی
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मेरा ख़ामोश रह कर भी उन्हें सब कुछ सुना देना
قمر جلالوی द्वारा
مرا خاموش رہ کر بھی انہیں سب کچھ سنا دینا
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कर नाला कशी कब तईं औक़ात गुज़ारें
मीर तक़ी मीर द्वारा
کر نالہ کشی کب تئیں اوقات گزاریں
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