ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
फ़िराक़
सभी
154
अशआर
0
ग़ज़ल
154
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
कली कहते हैं उस का सा दहन है
मीर तक़ी मीर द्वारा
کلی کہتے ہیں اس کا سا دہن ہے
0
समझ में ज़िंदगी आए कहाँ से
जौन एलिया द्वारा
سمجھ میں زندگی آئے کہاں سے
0
अभी फ़रमान आया है वहाँ से
जौन एलिया द्वारा
ابھی فرمان آیا ہے وہاں سے
0
रंज खींचे थे दाग़ खाए थे
मीर तक़ी मीर द्वारा
رنج کھینچے تھے داغ کھائے تھے
0
शाम-ए-फ़िराक़ अब ना पूछ आई और आ के टल गई
فیض احمد فیض द्वारा
شام فراق اب نہ پوچھ آئی اور آ کے ٹل گئی
0
न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
जौन एलिया द्वारा
نہ ہوا نصیب قرار جاں ہوس قرار بھی اب نہیں
0
आँखों में नमी आई चेहरे पे मलाल आया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھوں میں نمی آئی چہرے پہ ملال آیا
0
याद-ए-ग़ज़ाल चश्माں ज़िक्र-ए-समन अज़ारاں
فیض احمد فیض द्वारा
یاد غزال چشماں ذکر سمن عذاراں
0
ये क्या कि सब से बयाँ दिल की हालतें करनी
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ کیا کہ سب سے بیاں دل کی حالتیں کرنی
0
अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
ابھی کچھ اور کرشمے غزل کے دیکھتے ہیں
0
यूं न आँखें बदल मुझ से मेरे सनम
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
یوں نہ آنکھیں بدل مجھ سے میرے صنم
0
हम से कुछ आगे ज़माने में हुआ क्या क्या कुछ
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم سے کچھ آگے زمانے میں ہوا کیا کیا کچھ
0
वफ़ा-ए-वादा नहीं वादा-ए-दिगर भी नहीं
فیض احمد فیض द्वारा
وفائے وعدہ نہیں وعدۂ دگر بھی نہیں
0
शर्ह-ए-फ़िराक़ मदह-ए-लब-ए-मुश्कबू करें
فیض احمد فیض द्वारा
شرح فراق مدح لب مشکبو کریں
0
गाहे गाहे बस अब यही हो क्या
जौन एलिया द्वारा
گاہے گاہے بس اب یہی ہو کیا
0
हालत हाल के सबब हालत हाल ही गई
जौन एलिया द्वारा
حالت حال کے سبب حالت حال ہی گئی
0
हम ने सब शेर में संवारे थे
فیض احمد فیض द्वारा
ہم نے سب شعر میں سنوارے تھے
0
एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा
परवीन शाकिर द्वारा
ایک سورج تھا کہ تاروں کے گھرانے سے اٹھا
0
बिछड़ा है जो इक बार तो मिलते नहीं देखा
परवीन शाकिर द्वारा
بچھڑا ہے جو اک بار تو ملتے نہیں دیکھا
0
जान से इश्क़ और जहाँ से गुरेज़
अहमद फ़राज़ द्वारा
جان سے عشق اور جہاں سے گریز
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें