ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
ग़म-ए-इश्क़
सभी
128
अशआर
0
ग़ज़ल
128
ग़ज़ल
128
0
उस का ख़याल चश्म से शब-ए-ख़्वाब ले गया
اس کا خیال چشم سے شب خواب لے گیا
0
ख़बर ही नहीं कैसे अंगड़ाई ले कर निगाहें उठाए कि साग़र उठाए
خبر ہی نہیں کیسے انگڑائی لے کر نگاہیں اٹھائے کہ ساغر اٹھائے
0
सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं
سب قتل ہو کے تیرے مقابل سے آئے ہیں
0
तरस रहा हूँ मगर तू नज़र न आ मुझ को
ترس رہا ہوں مگر تو نظر نہ آ مجھ کو
0
कब तक तू इम्तिहाँ में मुझ से जुदा रहेगा
کب تک تو امتحاں میں مجھ سے جدا رہے گا
सभी देखें
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें