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हस्ती अपनी हबाब की सी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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जीते जी कूचए-दिल-दार से जाया न गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
جیتے جی کوچۂ دل دار سے جایا نہ گیا
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ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
غم رہا جب تک کہ دم میں دم رہا
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चमन में गुल ने जो कल दावा-ए-जमाल किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
چمن میں گل نے جو کل دعوی جمال کیا
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चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
فیض احمد فیض द्वारा
چاند نکلے کسی جانب تری زیبائی کا
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जब रोने बैठता हूँ तब क्या कसर रहे है
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب رونے بیٹھتا ہوں تب کیا کسر رہے ہے
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तेरा रुख़ मुख़तत क़ुरआन है हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
تیرا رخ مخطط قرآن ہے ہمارا
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जिस सर को ग़ुरूर आज है यां ताजवरी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
جس سر کو غرور آج ہے یاں تاجوری کا
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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
فیض احمد فیض द्वारा
دونوں جہان تیری محبت میں ہار کے
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हुस्न मरहून जोश-ए-बादः-ए-नाज़
فیض احمد فیض द्वारा
حسن مرہون جوش بادۂ ناز
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अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب کے تجدید وفا کا نہیں امکاں جاناں
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देख तो दिल के जाँ से उठता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
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जी में है याद रुख-ओ-ज़ुल्फ़-ए-सियाह-फ़ाम बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
جی میں ہے یاد رخ و زلف سیہ فام بہت
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आवेगी मेरी क़ब्र से आवाज़ मेरे बाद
मीर तक़ी मीर द्वारा
آوے گی میری قبر سے آواز میرے بعد
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लब तेरे लअल-ए-नाब हैं दोनों
मीर तक़ी मीर द्वारा
لب ترے لعل ناب ہیں دونوں
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किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आशना नहीं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
کس کو سناؤں حال غم کوئی غم آشنا نہیں
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तुम आए हो न शब-ए-इंतज़ार गुज़री है
فیض احمد فیض द्वारा
تم آئے ہو نہ شب انتظار گزری ہے
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फ़क़ीराना आए सदा कर चले
मीर तक़ी मीर द्वारा
فقیرانہ آئے صدا کر چلے
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इस अहद में इलाही मोहब्बत को क्या हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس عہد میں الٰہی محبت کو کیا ہوا
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