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दिल बदन का शरीक-ए-हाल कहाँ
دل بدن کا شریک حال کہاں
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इश्क़ नशा है न जादू जो उतर भी जाए
عشق نشہ ہے نہ جادو جو اتر بھی جائے
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ये मैं भी क्या हूँ उसे भूल कर उसी का रहा
یہ میں بھی کیا ہوں اسے بھول کر اسی کا رہا
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रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा
رہتا ہے ہڈیوں سے مری جو ہما لگا
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चल निकलती हैं ग़म-ए-यार से बातें क्या क्या
چل نکلتی ہیں غم یار سے باتیں کیا کیا
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