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शिकवा करूँ मैं कब तक उस अपने मेहरबाँ का
شکوہ کروں میں کب تک اس اپنے مہرباں کا
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कहे है कोह-कन कर फ़िक्र मेरी ख़स्ता-हाली में
کہے ہے کوہ کن کر فکر میری خستہ حالی میں
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निकले है जिंस-ए-हुस्न किसी कारवाँ में
نکلے ہے جنس حسن کسی کاروان میں
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क्या क्या बैठे बिगड़ बिगड़ तुम पर हम तुम से बनाए गए
کیا کیا بیٹھے بگڑ بگڑ تم پر ہم تم سے بنائے گئے
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दिल बर्बाद को आबाद किया है मैंने
دل برباد کو آباد کیا ہے میں نے
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