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सभी कुछ है तेरा दिया हुआ
فیض احمد فیض द्वारा
سبھی کچھ ہے تیرا دیا ہوا
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अंधेरे लाख छा जाएँ उजाला कम नहीं होता
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اندھیرے لاکھ چھا جائیں اجالا کم نہیں ہوتا
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फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाए
فیض احمد فیض द्वारा
پھر آئینۂ عالم شاید کہ نکھر جائے
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न हरीफ़-ए-जाँ न शरीक-ए-ग़म शब-ए-इंतज़ार कोई तो हो
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ حریف جاں نہ شریک غم شب انتظار کوئی تو ہو
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न गनवाओ नावक-ए-नीम-कश दिल रेज़ा रेज़ा गनवा दिया
فیض احمد فیض द्वारा
نہ گنواؤ ناوک نیم کش دل ریزہ ریزہ گنوا دیا
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हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तो
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہوئی ہے شام تو آنکھوں میں بس گیا پھر تو
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करेंगे शिक्व-ए-जौर-ओ-जफ़ा दिल खोल कर अपना
قمر جلالوی द्वारा
کریں گے شکوۂ جور و جفا دل کھول کر اپنا
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अफ़ई की तरह डसने लगी मौज-ए-नफ़स भी
अहमद फ़राज़ द्वारा
افعی کی طرح ڈسنے لگی موج نفس بھی
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ता हम को शिकायत की भी बाक़ी न रहे जा
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
تا ہم کو شکایت کی بھی باقی نہ رہے جا
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