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वह अहद-ए-ग़म की काहिश-हाए-बे-हासिल को क्या समझें
فیض احمد فیض द्वारा
وہ عہد غم کی کاہش ہائے بے حاصل کو کیا سمجھے
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ज़िक्र भी उस से क्या भला मेरा
जौन एलिया द्वारा
ذکر بھی اس سے کیا بھلا میرا
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अव्वल अव्वल की दोस्ती है अभी
अहमद फ़राज़ द्वारा
اول اول کی دوستی ہے ابھی
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ग़ैरत-ए-इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी
अहमद फ़राज़ द्वारा
غیرت عشق سلامت تھی انا زندہ تھی
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फ़क़ीह-ए-शहर की मजलिस से कुछ भला न हुआ
अहमद फ़राज़ द्वारा
فقیہ شہر کی مجلس سے کچھ بھلا نہ ہوا
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फिर मिरे शहर से गुज़रा है वो बादल की तरह
परवीन शाकिर द्वारा
پھر مرے شہر سے گزرا ہے وہ بادل کی طرح
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वो दुश्मन-ए-जाँ जाँ से प्यारा भी कभी था
अहमद फ़राज़ द्वारा
وہ دشمن جاں جان سے پیارا بھی کبھی تھا
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