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दोनों हैं उन के हिज्र का हासिल लिये हुए
دونوں ہیں ان کے ہجر کا حاصل لئے ہوئے
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सैर कर अंदलीब का अहवाल
سیر کر عندلیب کا احوال
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फिर मिरे शहर से गुज़रा है वो बादल की तरह
پھر مرے شہر سے گزرا ہے وہ بادل کی طرح
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हिज्राँ की कोफ़्त खेंचे बे-दम से हो चले हैं
ہجراں کی کوفت کھینچے بے دم سے ہو چلے ہیں
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उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया
اس نے سکوت شب میں بھی اپنا پیام رکھ دیا
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