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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
अहमद फ़राज़ द्वारा
رنجش ہی سہی دل ہی دکھانے کے لیے آ
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उम्र भर हम रहे शराबी से
मीर तक़ी मीर द्वारा
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
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अश्क आँखों में कब नहीं आता
मीर तक़ी मीर द्वारा
اشک آنکھوں میں کب نہیں آتا
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चोरी में दिल की वो हुनर कर गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
چوری میں دل کی وہ ہنر کر گیا
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जी में है याद रुख-ओ-ज़ुल्फ़-ए-सियाह-फ़ाम बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
جی میں ہے یاد رخ و زلف سیہ فام بہت
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जिन जिन को था यह इश्क़ का आज़ार मर गए
मीर तक़ी मीर द्वारा
جن جن کو تھا یہ عشق کا آزار مر گئے
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तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
تمہاری یاد کے جب زخم بھرنے لگتے ہیں
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अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा
Amjad Islam Amjad द्वारा
اپنے گھر کی کھڑکی سے میں آسمان کو دیکھوں گا
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अब जो कोई पूछे भी तो इससे क्या शर्ह-ए-हालात करें
فیض احمد فیض द्वारा
اب جو کوئی پوچھے بھی تو اس سے کیا شرح حالات کریں
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कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
परवीन शाकिर द्वारा
کچھ تو ہوا بھی سرد تھی کچھ تھا ترا خیال بھی
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कब याद में तेरा साथ नहीं कब हात में तेरा हात नहीं
فیض احمد فیض द्वारा
کب یاد میں تیرا ساتھ نہیں کب ہات میں تیرا ہات نہیں
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सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते
अहमद फ़राज़ द्वारा
سلسلے توڑ گیا وہ سبھی جاتے جاتے
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बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना
परवीन शाकिर द्वारा
بادباں کھلنے سے پہلے کا اشارہ دیکھنا
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दैर-ओ-हरम से गुज़रे अब दिल है घर हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیر و حرم سے گزرے اب دل ہے گھر ہمارا
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गिरां-ए-शब-ए-हिज्रां दो चंद क्या करते
فیض احمد فیض द्वारा
گرانئ شب ہجراں دو چند کیا کرتے
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पूरा दुख और आधा चाँद
परवीन शाकिर द्वारा
پورا دکھ اور آدھا چاند
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चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया
परवीन शाकिर द्वारा
چلنے کا حوصلہ نہیں رکنا محال کر دیا
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कुछ करो फ़िक्र मुझ दीवाने की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کچھ کرو فکر مجھ دوانے کی
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ग़ज़ल मीरؔ की कब पढ़ाई नहीं
मीर तक़ी मीर द्वारा
غزل میرؔ کی کب پڑھائی نہیں
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तुम अपनी याद से कह दो न जाए छोड़ के दिल
قمر جلالوی द्वारा
تم اپنی یاد سے کہہ دو نہ جائے چھوڑ کے دل
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