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हिज्र

सभी 112अशआर 0ग़ज़ल 112
ग़ज़ल112
उन के जाते ही यह वहशत का असर देखा किये
ان کے جاتے ہی یہ وحشت کا اثر دیکھا کئے
कभी जो आँख पे गेसू-ए-यार होता है
کبھی جو آنکھ پہ گیسوئے یار ہوتا ہے
अब क्या सोचें क्या हालात थे किस कारन ये ज़हर पिया है
اب کیا سوچیں کیا حالات تھے کس کارن یہ زہر پیا ہے
कहा था किस ने कि अहद-ए-वफ़ा करो उस से
کہا تھا کس نے کہ عہد وفا کرو اس سے
कल शब-ए-हिज्राँ थी लब पर नाला-ए-बीमाराना था
کل شب ہجراں تھی لب پر نالہ بیمارانہ تھا
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